पिता : चिंता और यादें ! Father


वो पिता होता है ...............
अच्छे स्कूल में बच्चों  को डालने की 
दौड़-धूप करता है 
"ड़ोनेसन" के लिये उधार  लेकर भी 
जुगाड़ करता है 
समय की माँग हो तो सिफारिश के लिए 
हाथ जोड़ता है 
...........................वो पिता होता है

कॉलेज में साथ जाकर
हॉस्टल तलाश करता है
खुद फटी बनियान पहनकर
तुम्हे 'जीन्स' दिलाता है
...........................वो पिता होता है

खुद का मोबाइल 'फटीचर'
तुम्हे 'लेटेस्ट' दिलाता है
तुम्हारा 'प्रीपेड' का ख़र्चा सहता है, पर
तुम्हारी 'आवाज़' को तरसता है
...........................वो पिता होता है

'लव-मेर्रिज' करना चाहे कोई
तो खूब चिढ़ता है
'ये तुम्हारा आखरी फैसला है' पूछता है
और बाद में मान जाता है
'पापा आप कुछ समझते है ? यह सुनकर
मन में रोता है
...........................वो पिता होता है

ससुराल विदा हो बेटी तो वे-हिसाब रोता है
मेरी गौरेया को सम्भालना.....
हाथ जोड़ कर कहता है
...........................वो पिता होता है


पिता पर कविता बहुत कम है
पसंद आये तो 'शेयर' करें
और पिता का प्यार ज़माने को समझने का अबसर दें !
...........................वो पिता होता है



                               पिता

माँ घर का गौरव तो पिता घर का अस्तित्त्व होते है !
माँ के पास अश्रुधारा तो पिता के पास  संयम होता है !

दोनों समय का भोजन माँ  बनाती है तो जीवन भर भोजन की
ब्यबस्था करने वाले पिता को हम सहज ही भूल  जाते है !

कभी लगी जो ठोकर या चोट तो "ऑ माँ" ही मुह से निकलता है !
लेकिन रास्ता पार करते कोई ट्रक पास आकर ब्रेक लगाये तो
"बाप रे" यही मुँह से निकलता है !

क्योंकि छोटे छोटे संकटों  के लिए माँ है पर बड़े
संकट आने पर पिता ही याद आते है

पिता एक वत वृक्ष है,
जिसकी शीतल छाओं में सम्पूर्ण परिवार सुख से रहता है!


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