चाइल्ड लेबर यानी बाल मजदूरी हम सभी आये दिन अखवार , टेलीविज़न में और लोगों से सुनते है कि बाल मजदूरी एक अभिशाप है ! मगर फिर भी हम इसे नहीं रोकते ! देख कर भी अनदेखा करते हैं ! कई बच्चों का बचपन तो काम में ही खत्म हो जाता है कब बच्चे से जवान और कब बूढ़े हो जातें है पता ही नहीं चलता ! सड़कों के चौराहों पर, लाल बत्तीयों पर, आस पास घरों में, कारखानों में या सब्जी बेचते हुए ! हम सब देखतें है और आगे चले जाते है !
क्यों ?
ऐसा ही हमें पूर्वी दिल्ली, शास्त्री नगर के एक पार्क में देखने को मिला जहाँ बच्चे पार्क में बाल मजदूरी कर रहे थे !
इस पार्क में लिखा है कि यहाँ खेलना मना है अगर पार्क में खेलना मना है तो बच्चों का मजदूरी करना सही है ?
क्या, ये सभी पार्क बच्चों से काम करवाने के लिए बने हैं! यहाँ बच्चे खेलेंगे नहीं तो ऐसे मासूम बच्चों का भविष्य क्या होगा ?
अगर हमें इस बुराई को जड़ से मिटाना है तो हमें मिलकर इस अपराध को रोकना होगा !
इस पार्क में लिखा है कि यहाँ खेलना मना है अगर पार्क में खेलना मना है तो बच्चों का मजदूरी करना सही है ?
क्या, ये सभी पार्क बच्चों से काम करवाने के लिए बने हैं! यहाँ बच्चे खेलेंगे नहीं तो ऐसे मासूम बच्चों का भविष्य क्या होगा ?
अगर हमें इस बुराई को जड़ से मिटाना है तो हमें मिलकर इस अपराध को रोकना होगा !
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